नेशनल लोक अदालत में 2.39 लाख से अधिक मामलों का निपटारा, 1639 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सेटलमेंट
इस नेशनल लोक अदालत में सर्वोच्च न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक विभिन्न न्यायालयों में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों की सुनवाई की गई। जिला राजनांदगांव, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी तथा जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई में कुल 2,37,886 मामलों को निराकरण के लिए चिन्हित किया गया था। लोक अदालत के सुचारु संचालन के लिए कुल 43 खंडपीठों का गठन किया गया।लोक अदालत के दौरान 2,39,310 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इनमें 2,34,477 प्री-लिटिगेशन मामले और4,833 लंबित न्यायालयीन मामले शामिल हैं। इन मामलों में लगभग 1639 करोड़ 55 लाख 85 हजार 370 रुपये** की राशि का सेटलमेंट किया गया।लोक अदालत में आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट) से संबंधित मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, बैंक ऋण वसूली, धन वसूली वाद, बिजली व टेलीफोन बिल, भूमि अधिग्रहण तथा राजस्व न्यायालयों से जुड़े प्रकरणों सहित कई अन्य मामलों का निपटारा किया गया।
बिखरा परिवार फिर से हुआ एक
नेशनल लोक अदालत के दौरान कुटुंब न्यायालय राजनांदगांव में लंबित एक पारिवारिक विवाद का भी सौहार्दपूर्ण समाधान हुआ। माननीय न्यायाधीश उत्तरा कुमार कश्यप की अदालत में श्रीमती दुर्गेश्वरी वर्मा और सुरेश कुमार वर्मा के बीच चल रहे विवाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया। दहेज प्रताड़ना और पारिवारिक विवाद के कारण अलग रह रहे इस दंपत्ति के बीच लोक अदालत में आपसी सहमति से समझौता हो गया और मामला समाप्त कर दिया गया, जिससे परिवार फिर से एकजुट हो सका।
वैवाहिक विवाद का भी हुआ समाधान
इसी तरह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता की अदालत में चंद्रकुमार गेंड्रे और तारामती गेंड्रे के बीच चल रहे व्यवहार वाद का भी नेशनल लोक अदालत में निपटारा किया गया। दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता होने के बाद प्रकरण समाप्त कर दिया गया।नेशनल लोक अदालत के माध्यम से न केवल हजारों मामलों का त्वरित समाधान हुआ, बल्कि कई परिवारों में आपसी समझ और सौहार्द भी स्थापित हुआ। यह पहल न्यायपालिका द्वारा त्वरित, सुलभ और किफायती न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।







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