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सोमवार, फ़रवरी 09, 2026

‎सामाजिक बहिष्कार से परेशान व्यक्ति ने उठाया आत्मघाती कदम, प्रशासन पर उठे सवाल

सामाजिक बहिष्कार से परेशान व्यक्ति ने उठाया आत्मघाती कदम, प्रशासन पर उठे सवाल

स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार 
दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)
सोमवार 09/02/2026

गंडई | कटंगी गांव में कथित सामाजिक बहिष्कार और मनमाने तरीके से अर्थदंड वसूला जाता है।शीतलाल के अनुसार, गांव के कथित समाज प्रमुख सुद्धू निर्मलकर, राजू रजक, निरंजन रजक, कुलेश्वर रजक, विजय रजक और तुलसु निर्मलकर गांव में अपनी मनमानी व्यवस्था चलाते हैं। जब उसने इस अवैध व्यवस्था का विरोध किया, तो उसे सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि गांव में उसके बच्चों को अन्य बच्चों से बात करने से रोका जाता है, कोई उससे संवाद नहीं करता और किसी भी सामाजिक बैठक में शामिल होने पर उसे भगा दिया जाता है। इस तरह के लगातार मानसिक उत्पीड़न से वह गहरे मानसिक तनाव में चला गया।शीतलाल ने बताया कि उसने इस मामले की शिकायत गंडई थाना, कलेक्टर कार्यालय, गृह मंत्रालय और मानवाधिकार आयोग तक कई बार की,लेकिन कहीं भी उसकी शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासनिक उपेक्षा से हताश होकर उसने आत्महत्या करने जैसा कठोर कदम उठाने का प्रयास किया। घटना के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक संवेदनशीलता और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक बहिष्कार जैसी कुप्रथा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने शिकायतों की पुनः समीक्षा की संभावना जताई है। ‎वही सामाजिक बहिष्कार के बाद प्रशासनिक कार्रवाई न होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखते हुए  कहा कि समाज में इसी तरह के मामले को अनदेखा करने के कारण ही धर्मांतरण जैसे मामले बढ़ते जा रहे हैं। तथा अपने ही समाज के प्रति नकारात्मकता बढ़ती जाती है। ऐसे मामलों पर प्रशासन को तात्कालिक कार्रवाई करनी चाहिए साथ ही सामाजिक बहिस्कार के खिलाफ समाज में हो रहे मनमानी पर रोक लगाने हेतु तत्काल  कानून बननी चाहिए।कुछ लोगों ने  अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि ‎छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार के बाद प्रशासनिक कार्रवाई न होने के कारण धर्मांतरण की घटनाओं में वृद्धि देखी जाती रही है। कई जगहों से सामने आए मामलों ने प्रशासन की भूमिका और सामाजिक समरसता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बहुत से गांवों में समुदाय विशेष से जुड़े लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया गया। बहिष्कार के दौरान प्रभावित परिवारों को सामाजिक गतिविधियों से अलग कर दिया गया,यहां तक कि उन्हें गांव के संसाधनों और सहयोग से भी वंचित रखा गया,एवं कई जगह तो धर्मांतरण के आरोप में शासकीय योजनाओं के लाभ से भी वंचित कर दिया गया था,

*ऐसे हालात में कई परिवारों ने वैकल्पिक सामाजिक सुरक्षा और समर्थन की तलाश में धर्म परिवर्तन का रास्ता अपनाया*

स्थानीय लोगों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बावजूद समय पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते पीड़ित परिवारों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ता गया, जिससे धर्मांतरण जैसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप करे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और पीड़ितों को सुरक्षा व विश्वास दिया जाए, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। वहीं कुछ संगठनों ने इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। 

फिलहाल कटंगी गांव के  मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक इस सामाजिक बहिष्कार के संबंध में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले दिनों में जांच या कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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