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बुधवार, अगस्त 17, 2022

पत्नी की गुमशुदगी रिपोर्ट थाने में दर्ज, आयोग द्वारा दुर्ग आईजी को पत्र प्रेषित कर निराकरण हेतु मंगाया जाएगा जल्द से जल्द रिपोर्ट- डॉ किरणमयी नायक

पत्नी की गुमशुदगी रिपोर्ट थाने में दर्ज, आयोग द्वारा दुर्ग आईजी को पत्र प्रेषित कर निराकरण हेतु मंगाया जाएगा जल्द से जल्द रिपोर्ट- डॉ किरणमयी नायक

"स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार"
*दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)*
17अगस्त 2022





नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रत्याशी द्वारा क्रास वोटिंग का संदेह की शिकायत पर आयोग द्वारा समझाइश देकर प्रकरण को किया गया नस्तीबद्ध आवेदिका द्वारा धर्मांतरण के आशंका पर अनावेदको द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। जिस पर आयोग की अध्यक्ष डॉ नायक ने संज्ञान लेते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक करेंगे इस प्रकरण की सम्पूर्ण जांच बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में आयोग ने लिया था स्वतः संज्ञान- बालोद पुलिस ने त्वरित कार्यवाही कर आरोपी शिक्षक को लिया हिरासत में।

बालोद 18 अगस्त 2022

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक एवं सदस्य डाॅ. अनिता रावटे, अधिवक्ता सुश्री शमीम रहमान ने आज संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में महिलाओं से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई की। इस दौरान बालोद जिले के कुल 21 प्रकरण रखे गए। जिसमें से 13 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। 03 प्रकरण को रायपुर जिले की सुनवाई में रखा गया। राज्य महिला आयोग द्वारा 01 प्रकरण को स्वतः संज्ञान में लेते हुए एफआईआर दर्ज कर अपराधी को हिरासत में रखा गया है। बालोद जिले के एक स्कूल का था जिसमे आरोपी शिक्षक ने लड़कियों से छेड़छाड़ का मामला था जो एक अखबार में इसे दिया गया था जिसे आयोग की अध्यक्ष ने तत्काल इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया और जिसके बाद आरोपी को बालोद पुलिस ने गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया है। सुनवाई के दौरान एक प्रकरण नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी को अध्यक्ष पद में हार का सामना करना पड़ा था जो इस प्रकरण में अनावेदक है और उनके द्वारा अपनी पार्टी कार्यालय में एक लिखित शिकायत किया गया था जिसमें आवेदिका का नाम एवं दो अन्य संदेही के उपर उन्हें क्रास वोटिंग का संदेह था। जिस पर पार्टी बैठक में अनावेदकगणों ने यह निर्णय लिया किया इस आवेदन को प्रदेश भाजपा कार्यालय भेजा गया और अनावेदकगणों अनुशंसा के लगभग 02 वर्ष बाद आवेदिका को भारतीय जनता पार्टी से निष्काषित कर दिया गया। आयोग द्वारा उभय पक्ष को सुना गया चुंकि यह प्रकरण नगर पालिका परिषद चुनाव में क्रास वोटिंग के दुष्परिणाम के कारण समाचार पत्रों में छपी खबर से आवेदिका को अपनी मानहानी कारक लगी है आयोग द्वारा पुछे जाने पर आवेदिका ने कहा कि इन अनावेदक के संबंध में पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालोद में भी शिकायत दी गई है जिसमें किसी प्रकार की कार्रवाई नही हुई है। आवेदिका के द्वारा प्रस्तुत प्रकरण उनकी व्यक्तिगत मानहानी और अनावेदकों के द्वारा चुनाव में क्रास वोटिंग के विषय से जुड़ा है। जिस पर निर्णय केवल न्यायलयीन प्रकरणों के द्वारा ही किया जाना संभव है। जिसका क्षेत्राधिकार केवल दीवानी न्यायालय एवं अपराधिक न्यायालय को है। आयोग ने दोनो पक्षों को समझाईश दिया कि वे चाहे तो एक दुसरे के विरुद्ध मानहानी का दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। इस समझाईश के साथ प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आवेदक पति ने अपनी पत्नी के गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में वर्ष 2017 में दर्ज कराया है। जिस पर अभी तक आवेदक के पत्नी का पता नहीं चल पाया है। आयोग द्वारा दुर्ग आईजी को पत्र प्रेषित किया जाएगा। जिसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द मंगाया जाएगा जिससे इस प्रकरण का निराकरण किया जा सकेगा।
   इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में आवेदिका को अनावेदक क्रमांक 01 से किसी भी प्रकार से शिकायत नही है आवेदिका ने बताया कि शेष अनावेदक का कॉन्ट्रेक्ट समाप्त कर दिया था क्योंकि आवेदिका की शिकायत सही पायी गई थी। परंतु इस शिकायत के आयोग में लंबित होने के कारण आवेदिका के संविदा का नवीनीकरण नही किया गया है इस स्तर पर अनावेदक ने कहा की आवेदिका का नवीनीकरण नही हुआ है अनावेदक ने आयोग से निवेदन किया कि आवेदिका के सम्बंधित उच्चाधिकारियों को पत्र जारी कर आवेदिका का संविदा वृद्वि करा दिया जाए एवं अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया जाए। चूंकि आवेदिका के पास शेष अनावेदकों का पता नही है इस कारण प्रकरण को जारी रखने का संभव नही है। इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।
 एक अन्य प्रकरण में आवेदिका की बहन की फांसी लगाने से हुई मृत्यु को लेकर अनावेदकगणों के उपर शंका है और घटना रायपुर जिले के देवेन्द्र नगर थाने के क्षेत्र में होने के कारण आवेदिका को अब तक पीएम रिपोर्ट की जानकारी नही होने से संदेह और बढ़ गया है और यह प्रकरण समाप्त हो चुका है। परंतु हम लोगों को अब तक परेशान किया जा रहा है। इस प्रकरण को रायपुर जिले की सुनवाई में रखा गया है इस प्रकरण की संपूर्ण जांच के बाद निराकृत किया जाएगा। इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में आवेदिका द्वारा धर्मांतरण के आशंका पर अनावेदको द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। जिस पर आयोग की अध्यक्ष डॉ नायक ने तत्काल संज्ञान में लेते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पुलिस अधिक्षक बालोद को पत्र प्रेषित किया जाएगा। पुलिस प्रतिवेदन आने के बाद इस प्रकरण का निराकरण किया जाएगा।  




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मंगलवार, मई 24, 2022

राज्यों में प्रत्‍येक को करीब 4,500 करोड़ की बचत होगी सुनिश्चित मासिक भुगतान से उत्पादक कंपनियों को मिलेगा लाभ

बिजली मंत्रालय डिस्कॉम के पिछले बकाया को समाप्त करने की योजना पर काम कर रहा है

डिस्कॉम पर 18 मई 2022 तक उत्पादन कंपनियों का 1,00,018 करोड़ रुपये बकाया
डिस्कॉम को 48 मासिक किश्तों में बकाया भुगतान करने की अनुमति दी जाएगी,

विलंब से भुगतान पर 19,833 करोड़ रुपये अधिशुल्क की होगी बचत
बिजली उपभोक्ताओं को इस राशि की राहत मिलेगी,

 क्योंकि यह खुदरा शुल्क पर हस्तांतरित नहीं होगी
महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रत्‍येक को करीब 4,500 करोड़ की बचत होगी
सुनिश्चित मासिक भुगतान से उत्पादक कंपनियों को मिलेगा लाभ


*स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार* 
दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)
बालोद 491771 (छ.ग.)





डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियोंकी बकाया राशि का भुगतान करने में असमर्थता बिजली क्षेत्र की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को प्रभावित करती है। इस स्थिति पर विचार करते हुए बिजली मंत्रालय वितरण कंपनियों (डिस्कॉमके वित्तीय संकट को कम करने के लिए एक योजना पर काम कर रहा है जो अपने बकाया का भुगतान करने में असमर्थ हैं।

       वितरण कंपनी द्वारा उत्पादन कंपनी को भुगतान में विलंब किए जाने से उत्पादन कंपनी के नकदी प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैजिसे कोयले के रूप में इनपुट आपूर्ति के लिए प्रावधान करने की आवश्यकता होती है और बिजली संयंत्र के दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए पर्याप्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। प्राप्ति (PRAAPTI) पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार,18 मई 2022 तकडिस्कॉम की बकाया राशि (विवादित राशि और विलंबित भुगतान अधिभार (एलपीएससीको छोड़कर) 1,00,018 करोड़ रुपये और एलपीएससी बकाया 6,839 करोड़ रुपये थे।


          प्रस्तावित योजना डिस्कॉम द्वारा वित्तीय बकाया का आसान किश्तों में भुगतान को आसान बनाती है। सभी डिस्कॉम को एकमुश्त छूट देने पर विचार किया जा रहा हैजिसमें योजना की अधिसूचना की तारीख को बकाया राशि (मूलधन और एलपीएससी शामिल हैको एलपीएससी के आगे लगाए बिना फ्रीज कर दिया जाएगा।


डिस्कॉम को 48 किश्तों में बकाया राशि का भुगतान करने की छूट दी जाएगी। एलपीएससी लगाए बिना आस्थगित तरीके से बकाया राशि का परिसमापन डिस्कॉम को उनके वित्त में वृद्धि करने का समय देगा। साथ हीउत्पादक कंपनी को सुनिश्चित मासिक भुगतान से लाभ होगा जो अन्यथा उन्हें नहीं मिल रहा था। हालांकिडिस्कॉम द्वारा किस्त के भुगतान में देरी के मामले मेंविलंब भुगतान अधिभार संपूर्ण बकाया राशि पर देय होगाजिसे अन्यथा छूट दी गई थी।

   प्रस्तावित योजना के परिणामस्वरूपडिस्कॉम अगले 12 से 48 महीनों में एलपीएससी पर 19,833 करोड़ रुपये की राशि बचाएंगे।

            

          तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों जिन पर बड़ी बकाया राशि हैइस उपाय के परिणामस्वरूप प्रत्येक को 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। उत्तर प्रदेश को लगभग 2,500 करोड़ रुपये जबकि आंध्र प्रदेशजम्मू और कश्मीरराजस्थान तथा तेलंगाना जैसे राज्यों को 1,100 करोड़ से 1,700 करोड़ रुपये की बचत होगी। डिस्कॉम द्वारा की जाने वाली बचत से आखिरकार खुदरा शुल्क में एलपीएससी के बोझ को कम करके बिजली उपभोक्ता को लाभ होगा।


        इस उपाय से बकाया का समय पर भुगतान होने की उम्मीद है जो एलपीएससी पर छोड़ी गई राशि की तुलना में उत्पादन कंपनियों के लिए अति महत्वपूर्ण है। साथ हीयह सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त उपाय किए जा रहे हैं कि डिस्कॉम नियमित आधार पर जेनकोस यानी उत्पादन कंपनियां अपने बकाया का भुगतान करेंअन्यथा जेनकोस द्वारा आपूर्ति कम हो जाएगी।

     विलंब भुगतान अधिभार (एलपीएससीएक डिस्कॉम द्वारा एक जनरेटिंग कंपनी को बेस रेट (एसबीआई की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (एमसीएलआरपर आंकी गईपर बकाये के भुगतान पर लगाया जाता है। एलपीएससी डिफॉल्ट के पहले महीने के लिए आधार दर पर डिफॉल्ट की अवधि और किसी भी समय आधार दर पर अधिकतम फीसदी के अधीन बाद के प्रत्येक महीने के लिए 0.5 फीसदी की वृद्धि के लिए लागू है।




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बुधवार, मई 18, 2022

दो किसानों के बीच हुई धान कटाई को लेकर गाली गलौज और हाथापाई थाने में हुआ मामला दर्ज...

दो किसानों के बीच हुई धान कटाई को लेकर गाली गलौज व हाथापाई थाने में हुआ मामला दर्ज...



*स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार*
दैनिक हिंदी वेब मीडिया बालोद (छ.ग.)

15/05/2022




    

     ग्राम पंचायत भरनाभाट स्थित आश्रित ग्राम डुमरघुंचा में फिर से मामला गरमा गया है, बता दूं की टी.आई.नवीन बोरकर जी जबतक थे, देवरी थाने में मामला सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन जैसे ही बोरकर सर का बालोद तबादला हुआ, डुमरघुंचा में राजनीति का रुख फिर से विवादों की ओर मुड़ चुका है। शांति व्यवस्था के साथ–साथ न्यायपूर्ण व्यवहार के भी धनी है, नवीन बोरकर साहब।लोग उनका सहृदय सम्मान करते हैं। और लोगों के दिल में जगह बना चुके हैं। जैसे को तैसा कारवाई करने वाले दिल के धनी व्यक्ति है हमारे बोरकर सर।


      विभाग में टी.आई. का फेरबदल हुए मुस्किल से 15 दिन भी नहीं हुए होंगे, की फिर एक नया मारपीट का मामला ग्राम डुमरघुंचा का  आया है,मामला देवरी थाना क्षेत्रांतर्गत स्थित ग्राम डूमर्घुंचा का है जन्हा दो पक्षों में जमकर गाली गलौज के साथ हाथापाई का है।
      ग्राम डूमरघुंचा के पंचायत भरनाभाट के उपसरपंच तिलक राम साहू निवासी ग्राम डुमरघुंचा और  निवासी किसान प्रदूमन साहू के बीच गाली गलौज वा हाथापाई हार्वेस्टर से धान कटाई के दौरान का  है। दोनों के बीच हार्वेस्टर लाने को लेकर विवाद वा अपशब्द कहे जाने के उपरांत उपसरपंच तिलक साहू निवासी ग्राम डूमर्घुंचा एवम दूसरा किसान पुत्र प्रदुमन स्वयं के हार्वेस्टर चालक के साथ धान कटाई का कार्य कर रहा था,साथ में  मनकी निवासी विकेश साहू के द्वारा फसल कटाई का करने के दौरान गांव के ही उपसरपंच तिलक साहू के द्वारा मां बहन की अभद्र गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ मुक्के से मारने का मामला सामने आया है।
जिसकी जांच पड़ताल के बाद देवरी थाने में मामले को पंजीबद्ध कर लिया गया है।

वहीं दूसरे पक्ष के आवेदक के तरफ से भी थाने की अपील दर्ज करवाया गया है जिसमें  तिलक साहू के बयानामानुसार,पुलिस थाना में मामले की जांच कर क्रमश:

अप.क्र.- 0/22, धारा 341, 294, 323, 506, 427, 34


के तहत पुलिस चौकी पिनकापर में मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है।

दूसरे प्रार्थी  उपसरपंच  तिलकराम डुमरघुचा ने अनावेदक के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा कि वह डुमरघुंचा का रहने वाला है। साथ में  खेती किसानी के अलावा ग्राम पंचायत भरनाभाट का उपसरपंच के पद पर पदस्थ है जोकि वह दिनांक 15.05.2022 के शाम 06.00 बजे के आसपास,धान सुख गया है या गिला है यह देखने के लिए अपने खेत जागेश्वर निषाद के धनहा खेत के आगे पहुंचा था तभी गांव के प्रदुमन साहू उनके दोस्त विकेश साहू जो की ग्राम मनकी का रहने वाला है दोनों ने एक राय होकर रास्ता रोककर मुझे माँ बहन की अश्लील गालिया दिया वा (***)तुम कौन होते हो किसके खेत देखने आ रहे हो साले दलाल और किसका धान कटवाओगे ..?हम लोग हार्वेस्टर वाले होकर धान नहीं कटा रहे है और तुम बाहर से हार्वेस्टर लाकर दलाली कर किसानों के धान कटवाते हो हम लोग हार्वेस्टर वाले होकर किसानो के धान नहीं काट रहे हैं ऐसा प्रदुमन साहू के द्वारा मेरे रास्ते रोककर हाथ में पकड़े डंडे से मुझे मारपीट किया,जिसके चलते बाये हाथ के हथेली तथा सीना में प्रदुमन के मारने से बायें हाथ की उगलिया में काफी चोटे आई हैं खून बह रहा हैं तथा दाहिने गाल तथा चेहरे तथा सीने में चोट आई हैं। मैंने मना किया तो प्रदुमन के दोस्त विकेश साहू जो मनकी के रहने वाला है उन्होंने भी हाथ मुक्का से मुझे मारपीट कर मां बहन की अश्लील गालिया देकर जान से मारने की धमकी दिये मारने के दौरान मेरा शर्ट फट गया है। हाथ व शरीर में काफी दर्द हो रहा है दोनों के द्वारा मुझे मां बहन की अश्लील गालिया दिया है जो सुनने में बुरा लगा जोकि घटना को गांव के कुलदीप, और गन्नू साहू ने देखा व सुना है। घटना के बाद मैं अपने घर डुमरघुचा आ गया था वहां पर प्रदुमन एवं उसके दोस्त मारने के लिए घर के बाहर आये थे, तब मैं डर के वजह से चौकी पिनकापार रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचना बताया जा रहा है।

     वहीं गवाहों वा दूसरे प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है की तिलक साहू को किसी ने डंडे से वार नहीं मारा है, डंडे से मारपीट करना बताना गलत है डंडे से मारपीट नही किया गया है बल्कि,डंडे को बाद में ले जाकर तिलक के द्वारा ही रखा गया है, जो की तिलक साहू के द्वारा पुलिस जांच से पहले झूठे मामले में फसाने के लिए रखा गया है। एवं हाथ को जबरदस्ती खुद से किसी चीज से काटकर झूठे मामले में फसाने की बात सामने आ रही है।

इसके पूर्व भी तिलक साहू के ऊपर दिनांक 12/09/2020 थाना डोंगरगांव में स्थित जंगल में जुहा खेलने के मामले  में  अपराधी पाया गया था एवं  कई बार झूठे f.i.r. करने के मामलों में कानूनन अपराधिक संलिप्तता देखी गई है। जोकि अपराधिक प्रवृति को दर्शाता है। ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की जरूरत है। ताकि ग्राम में  आंतरिक शांति बनी रहे...






तिलक साहू पिता गौकरण साहू उम्र 42 साल निवासी डुमरघुचा चौकी पिनकापार थाना देवरी जिला बालोद, घटना दिनांक 15.05.2022 के शाम 06.00 बजे करीबन घटना स्थल जागेश्वर निषाद के धनहा खेत ग्राम डुमरघुचा, सूचना दिनांक 15.05.2022 के रात्रि 08.30 बजे, नाम आरोपी-1. प्रदुमन साहू पिता होरी लाल साहू उम्र 27 साल साकिन ग्राम डुमरघुंचा चौकी पिनकापार,2 विकेश साहू पिता गोपाल साहू निवासी मनकी चौकी पिनकापार।

रविवार, मई 15, 2022

बालोद जिले के पत्रकारों की लापरवाही का वीडियो दिनों–दिन देखने को मिल रहा


बालोद जिले के पत्रकारों की मनमानी वसूली का वीडियो, आए दिन देखने को मिल रहा 




ऐसे पत्रकारों से सावधान रहें जिनका कोई वजूद ही नहीं




दिनांक 16/05/2022


1) बालोद–गुंदरदेही से खबर निकल कर आ रही है गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के मुंदेरा ग्राम पंचायत में सरपंच से जानकारी लेकर खबर न दिखाने एवम खबरों को छुपाने के लिए अथवा किसी मीडिया में प्रकाशन न करने के लिए, पैसा वसूल करने वाले, खुद को पत्रकार संघ का अध्यक्ष बताकर कई बार 5000 से 10000 रुपए की वसूली करने वाले पत्रकार के खिलाफ सरपंच ने सरपंच संघ के साथ मिलकर विधायक कुंवर सिंह निषाद, वा कलेक्टर बालोद, एसपी के समक्ष आवेदन सौपा है। 


ज्ञात हो की ऐसे ही कुछ पत्रकारों की वजह से आज सच को लोगों तक पहुंचने में कई वर्ष लग जाते हैं। उदाहरण के लिए कश्मीर में हुए कश्मीरी पंडितों के उपर शोषण को कई वर्षों बाद मूवी के माध्यम से अभी लाया गया। 

      वास्तविकता जब कुछ और है तो फिर उसे पहले क्यों नहीं दिखाया जाता या बताया जाता.?

ये भी एक सवाल उठता है। जब सरपंच या सचिव अपने कार्य ईमानदारी के साथ कर रहे हैं तो पैसे देने की जरूरत ही क्या थी। ऐसा तो नहीं है की पंचायत के कार्यों में गड़बड़ी करने के बदले समाचार प्रकाशन ना करें,इश्लिये दिए जा रहे थे राशि...

👉देखिए क्या कहा जा रहा है वीडियो में पब्लिक ऐप के माध्यम से वीडियो क्लिक करें लिंक को


2) बालोद–डौंडी  क्षेत्र से एक ग्राम सुर डोंगर से मामला सामने आया था। जिस पर व्यक्ति बोल रहे थे की दैनिक भास्कर में बिना कुछ जाने मेरे खिलाफ समाचार प्रकाशन कर दिया गया है।व्यक्ति ने भास्कर के प्रकाशन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी।थाने के सामने अपनी परिवार के साथ धरना में बैठे थे। जातिगत मोर्चा निकालकर थाने के सामने धरना पर बैठना गणेशराम को महंगा पड़ गया।
दूसरे दिन उस व्यक्ति गणेशराम मोची के साथ बुरी तरह मारपीट का वीडियो सामने आया। साथ ही उसके मकान पर तोड़फोड़कर उसके परिवार वालों के साथ जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे, घर एवम गांव से बेदखल कर दिया गया था।





इस वीडियो में वास्तविकता क्या थी।यह बताने की जरूरत ही नहीं है। वीडियो देखने से ही समझ आ जाता है। 

3)बालोद–भरनाभाट पंचायत से पीएम आवास में गड़बड़ी के मामले में एक समाचार आया उस पर गलती एवम गड़बड़ी पूर्व सरपंच सचिव के द्वारा किया गया था। लेकिन समाचार प्रकाशन में केवल सचिव की गलती बताकर उनका तबादला तो हो ही गया था,लेकिन उसके खिलाफ कारवाही करने की बात कहकर मामले को खतम कर दिया गया,जिसकी जानकारी RTI से हुई। जिसकी शिकायत जनपद सीईओ, जिला पंचायत सीईओ से की गई लेकिन यह बोलकर मामले को खतम कर दिया गया की जब भी आवास की नई स्कीम आयेगी। जो हितग्राही का नाम छूट चुका है। उनको अवगत करा दिया जाएगा। 
अब बात इतने में ही खतम नहीं हुआ इसके बाद भी हितग्राही का नाम जो गड़बड़ी हुआ था।

        सरकार ने गरीबों को जो भूमिहीन गरीब परिवार हैं उनको पट्टा वितरण किया गया था। उस पर हितग्राही के द्वारा स्वम के खर्चे से मकान निर्माण के लिए मैटेरियल की व्यवस्था की जा चुकी थी।उसे भी कुछ लोगों के द्वारा चोरी कर लिया गया था।
इसका समाचार प्रकाशन के लिए अबतक कोई संस्था सपोर्ट नहीं किए।और ना ही अबतक इसकी fir से कोई कारवाई की गई बल्कि इसके विपरित पंचायत में आरटीआई लगाकर प्रकाशन करने वाले हरिभूमि संस्था में कार्य करने वाले व्यक्ति को जान से मार मारने की धमकी दिया गया। ये तो रहा सन  2021–2022 का मामला।

पंचायत में हुई गड़बड़ी का खुलासा इस पीडीएफ फाइल में साफ देखा जा सकता है। 👇

















इन मामलों में कहीं न कहीं देखा जाए तो भ्रष्टाचार का ही मामला छुपा हुआ है जिसे कुछ पत्रकार खुलकर मामले का खुलासा करते हैं। वही बता दूं कुछ पत्रकार वसूली करने के लिए ही, सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं। ऐसे ही मामले का खुलासा अब पंचायतों में होने लगा है।पंचायतों में पूछताछ से पता चला की बहुत से पत्रकारों का आना जाना जाना लगा रहता है।जिनमें राजनादगांव के भी पत्रकार शामिल हैं।सबको कुछ न कुछ राशि देकर विदा करना पड़ता है। 
कुछ पंचायत सचिवों का कहना है की RTI का कागज लेकर आते हैं और बहुत सारी जानकारियां मांगते हैं उनमें हमारा ज्यादा समय वेस्ट हो जाता है जिनसे बचने के लिए उनको कुछ रुपए देकर उनसे अपना समय बचाते हैं।

लेकिन सच्चाई कुछ और हैं,पत्रकारों को जानकारी नहीं देने के बदले कार्यों में गड़बड़ी करने का मौका मिलता है।जिस वजह से आरटीआई के जवाब के बदले राशि देकर विदा करते हैं।

ताकि पंचायत स्तर पर हो रहे कार्यों में राशियों का गड़बड़ी कर सकें।

ऐसे पत्रकारों का जिले में रहना या किसी भी मीडिया संस्थानों में कार्य करना देश हित के लिए एवम किसी भी राज्य जिले वा समाज के विकाश के लिए बाधक हैं।भ्रष्टाचार को उजाकार करने के बजाए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना।ग्राम पंचायतों अथवा अन्य सरकारी विभागों से पैसे की उगाही करना निश्चित ही समाज के लिए खतरा है।


कुछ पत्रकारों की वजह से बड़े से बड़े भ्रष्टाचार का हौसला बुलंद रहता है।और बेखौफ घूमते रहते हैं। बेखौफ होकर  मनमानी करते हैं।जिसका खामियाजा एक आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है,तथा जो निस्वार्थ होकर पत्रकरिता करते हैं,उनका काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है,कई दफा तो जान माल का भी नुकसान झेलना पड़ जाता है,पत्रकारिता कानून लागू करने की घोषणा सही तो है पर इसका मुनाफा सही लोगों तक पहुंचे तब ठीक है अन्यथा ऐसे ही पत्रकारों जो उपर वर्णित है ऐसे लोगों तक पहुंच जाए तो भ्रष्टाचार और उगाही का मामला कभी खत्म नहीं होगा।और दंगाइयों के हौसले बुलंद होते रहेंगे।

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शुक्रवार, मई 13, 2022

नामकरण संस्कार ग्राम रिवागहन भरकटोला

नामकरण संस्कार

🙏🙏🙏

*** बधाई xपात्र ***
लोकेंद्र कुमार ढाले & नेमिन ढाले
संपर्क–7999709579
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏



*स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार*बालोद (छ.ग.)
13/05/2022 दिन शुक्रवार


मैं ईश्वर से प्रार्थना,
 करता हूं कि,
आपका बेटा आपके परिवार में अच्छी किस्मत
और
आशीर्वाद लाए,
नामकरण संस्कार 
की हार्दिक शुभकामनाएं...
💐💐💐




मैं आपको आपके कीमती बच्चे के लिए गर्मजोशी से गले मिलने और प्यार भेज रहा हूं।

नामकरण संस्कार 

की 

हार्दिक शुभकामनाएं...


💐💐💐💐💐💐💐💐

सबसे पहले,

भगवान आपके नवजात शिशु को आशीर्वाद दें,

भगवान इस दुनिया की हर बुरी चीज से इस बच्चे की रक्षा करें।

माता-पिता बनने पर 

ढेरों बधाई 

और 

नामकरण संस्कार 

की 

शुभकामनाएं...

💐💐💐

अपने बच्चे के नामकरण समारोह में मुझे आमंत्रित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद,

मुझे इस खूबसूरत समारोह में शामिल होकर बहुत खुशी होगी। भगवान आपके परिवार को आशीर्वाद दे।

जिस क्षण मैंने आपके बच्चे के नामकरण समारोह के बारे में सुना, मैं सचमुच खुश हो गया। मेरे उत्साह की कोई सीमा नहीं है। मैं उसे अपनी बाहों में पकड़ने के लिए इंतजार नहीं कर सकता। मुझे आमंत्रित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद...
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
जैसा कि आप अपने बच्चे का नाम रखते हैं, उसका जीवन खुशियों और खुशियों से भरा हो। भगवान उसे इस दुनिया की सारी सफलता दे,

और बधाई!



💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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गुरुवार, मई 12, 2022

कान्स फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की सूची ‘रॉकेट्री-द नांबी इफेक्ट’ फिल्म का कान्स में वर्ल्ड प्रीमियर होगा

कान्स फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की सूची
‘रॉकेट्री-द नांबी इफेक्ट’ फिल्म का कान्स में वर्ल्ड प्रीमियर होगा



*स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार*
 दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)
12/05/2022


तमिल, मराठी, मलयालम, मिशिंग एवं हिंदी भाषा की फिल्में मुख्य आकर्षण हों
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज कान्स फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की सूची जारी की है। सूची में रॉकेट्री का विश्व प्रीमियर भी शामिल है, जिसमें श्री आर माधवन ने मुख्य भूमिका निभायी है तथा इसका निर्देशन भी श्री माधवन ने किया है। रॉकेट्री-द नांबी इफेक्ट का प्रीमियर जहां पलाइस के में होगा वहीं बाकी फिल्मों का प्रदर्शन ओलम्पिया थिएटर में किया जाएगा। 75वें फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्में निम्न हैं:
1.‘रॉकेट्री - द नांबी इफेक्ट’
निर्देशक: श्री आर. माधवन     
निर्माता: श्री आर. माधवन
भाषा: हिंदी, अंग्रेजी, तमिल
सारांश
रॉकेट्री- द नांबी इफेक्ट फिल्म में श्री नांबी नारायणन के जीवन की कहानी को चित्रित किया गया है, जिसे एक टीवी कार्यक्रम में लोकप्रिय सुपरस्टार और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने एक साक्षात्कार में दर्शकों के सामने रखा था। कई महान व्यक्तियों की तरह, नांबी में भी कुछ कमियां हैं। अपनी प्रतिभा और जुनून के कारण उन्हें दुश्मनों और विरोधियों का सामना करना पड़ा। इन सभी बातों ने उन्हें एक आकर्षक आधुनिक नायक बना दिया। फिल्म समाज में मौन रहते हुए उपलब्धि हासिल करने वाले तथा इससे आगे जाकर भी कुछ करने वाले व्यक्ति के जीवन का वर्णन करती है। यह फिल्म दर्शकों को विशेष योगदानकर्ताओं की पहचान करने और उन्हें सम्मान देने की जिम्मेदारी लेने की चुनौती देती है, चाहे वे नांबी नारायणन हों, या गरीब बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षक हों, या सीमा पर तैनात सैनिक हों, या दूरदराज के गांवों में सेवा देने वाले डॉक्टर हों, या जरूरतमंदों की मदद करने वाले स्वयंसेवक हों। फिल्म एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने रखती है- हम शक्तिशाली लोगों के आधिपत्य के खिलाफ अपने निर्दोष और शक्तिहीन की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से क्यों नहीं खड़े होते हैं? एक नांबी के बदले, ऐसे मौन रहकर उपलब्धि हासिल करने वाले हजारों लोग हैं, जो न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन कहानियों को जानने-सुनने की जरूरत है। यह नांबी से शुरू होता है, लेकिन यह सिर्फ एक शुरुआत है।




2. गोदावरी

निर्देशक: श्री निखिल महाजन

निर्माता: ब्लू ड्रॉप फिल्म्स प्रा. लिमिटेड

भाषा: मराठी

सारांश

यह निशिकांत देशमुख की कहानी है- जो एक नदी के किनारे अपने परिवार के साथ एक पुरानी हवेली में रहते हैं। पीढ़ियों से निशि और उनका परिवार किराया वसूल करने वाला रहा है। उनके पास शहर के पुराने हिस्से के आसपास काफी संपत्ति है। उनके दादा, नरोपंत, डेमेंसिया से पीड़ित हैं, उनके पिता नीलकांत को भूलने की बीमारी है।

इस परिवार के वर्तमान वारिस के रूप में, निशिकांत अपने जीवन से निराश हैं। वे पुराने शहर के तरीकों से नफरत करते हैं, वे अपने जीवन की तुच्छता से नफरत करते हैं, वे इस बात से भी नफरत करते हैं कि वे अक्षम रहे हैं- लेकिन अधिकांश भारतीय पुरुषों की तरह, वे अपनी नफरत को अपने अन्दर समाहित करते हैं और सारा दोष किरायेदारों व शहर जैसे कारणों को देते हैं, जिन्हें पूरी तरह से दोषमुक्त भी नहीं कहा जा सकता है। निशिकांत किराया वसूल करते हैं और नदी से दूर अपने छोटे से अपार्टमेंट में वीडियो गेम खेलते रहते हैं। वे अपनी पत्नी और बेटी को अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए छोड़कर, अपनी पारिवारिक हवेली से बाहर इस अपार्टमेंट में रहते हैं। वे अपना समय नदी और उसके साथ आने वाली सभी चीज़ों पर गुस्सा करने में बिताते हैं। वे जानते हैं कि उनका जीवन अर्थहीन हो चुका है।

हालांकि, जीवन और मृत्यु हमेशा साथ-साथ आते हैं, बिना अवरोध के एक-दूसरे से जुड़े होते हैं एवं यह मिलन उस शहर में और भी अधिक स्पष्ट होकर उभरता है, जहां एक व्यक्ति की मृत्यु, इतने सारे लोगों के लिए जीने का तरीका होती है।




3. अल्फा बीटा गामा

निर्देशक: श्री शंकर श्रीकुमार

निर्माता: छोटी फिल्म प्रोडक्शंस

भाषा: हिंदी

सारांश

निर्देशन के क्षेत्र में जय का करियर निरंतर ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, जबकि उनका वैवाहिक जीवन संकट में है और वह अपनी प्रेमिका कायरा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उसकी पत्नी, मिताली- तलाक चाहती है ताकि वह अपने इंजीनियर प्रेमी रवि से शादी कर सके, जो कि उसके जल्द ही होने वाले पूर्व पति के उलट बेहद शांत और परवाह करने वाला है।

जब जय तलाक की बात करने के लिए आता है, तो रवि उस फ्लैट में मौजूद होता है जो कभी जय और मिताली का घर हुआ करता था। रवि यह महसूस करता है कि एक– दूसरे से विरक्त हो चुके दंपति के लिए उसके सामने तलाक पर चर्चा करना अजीब होगा। वह वहां से जाने का फैसला करता है।

लेकिन इससे पहले कि मिताली के जीवन में एक पुरुष दूसरे को रास्ता दे पाता, कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लग जाता है।

अब प्रेम के वायरस से पीड़ित तीन व्यक्ति यह तय करने के लिए जूझते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और किस कीमत पर, वह भी तब जबकि उनके पास अपने भीतर झांकने के अलावा और कहीं जाने का विकल्प उपलब्ध नहीं है।




4. बूम्बा राइड

निर्देशक: श्री बिस्वजीत बोरा

निर्माता: क्वाटरमून प्रोडक्शंस

भाषा: मिशिंग

सारांश

गॉड ऑन द बालकनी के निर्देशक बिस्वजीत बोरा की बूम्बा राइड भारत की ग्रामीण शिक्षा प्रणाली में फैले व्यापक भ्रष्टाचार पर एक तीखा हास्य व्यंग्य है– और यह आठ साल के एक ऐसे लड़के (नवोदित इंद्रजीत पेगू, एक उल्लेखनीय भूमिका में) के बारे में है जो हेराफेरी करके खेल को अपने पक्ष में करना जानता है। एक सच्ची कहानी से प्रेरित, इस फिल्म को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर ज्यादातर गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ शूट किया गया है।

इस फिल्म की कहानी एक साधनहीन स्कूल के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें केवल एक (अनिच्छुक) छात्र, बूम्बा है। अपनी नौकरी और फंडिंग को बनाए रखने के लिए बेताब उस स्कूल के सभी शिक्षक उदासीन एवं असहयोगी रवैया रखने वाले इस लड़के को कक्षा में आने के लिए रिश्वत देते हैं- जबकि बूम्बा की गुप्त इच्छा शहर के एक ऐसे बेहतर वित्त-पोषित स्कूल में जाने की है, जहां बस एक थोड़ी बड़ी और बहुत सुंदर लड़की पढ़ती हो।

निर्देशक बिस्वजीत बोरा कहते हैं, “बूम्बा राइड एक ऐसी फिल्म है जो मेरे दिल के बेहद करीब है। मेरा जन्म और पालन-पोषण असम के ग्रामीण इलाके में हुआ है। मैं वहां इसी किस्म की कहानियों का गवाह रहा हूं जहां सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में वो सारी उचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं जोकि किसी स्कूल में होनी चाहिए।” "मेरा मानना है कि जागरूकता बढ़ाने और अपने गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी लेकर ही हम व्यापक तरीके से बदलाव ला सकते हैं। इस फिल्म को बनाना आसान नहीं था क्योंकि मैंने गैर-अभिनेताओं के साथ शूटिंग की और हमारे बीच भाषा की बाधाएं भी थीं। हालांकि, मैं इसे अपने अब तक के सबसे अच्छे अनुभवों में से एक मानता हूं क्योंकि गांव के लोग बेहद सच्चे और मासूम थे। यह बात वाकई मेरे दिल को छू गई। गांव की लोकेशन उतनी ही खूबसूरत थी, जितनी कि इस फिल्म में दिखाई देती हैं और सबसे दिलचस्प बात यह है कि हमने स्थानीय लोगों के साथ वास्तविक लोकेशनों पर शूटिंग की। नायक बूम्बा भी उतना ही मासूम है और यह विश्वास करना बेहद कठिन है कि उसने अपने जीवन में सिनेमाघर तक नहीं देखा है। मुझे विश्वास है कि लोग इस गंभीर हास्य मिश्रित कहानी से जुड़ाव महसूस करेंगे क्योंकि यह और कुछ नहीं बल्कि एक ऐसे वास्तविक जीवन का सूक्ष्म चित्रण है जो वाकई में आज की दुनिया में मौजूद है।” 



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