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मंगलवार, जुलाई 30, 2024

सोशल मीडिया का असर

छत्तीसगढ़ के विकाश  पर, सोशल मीडिया  असरदार 

स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार 
*दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)*
30/07/2024




खैरागढ़/पेंड्रीकला छत्तीसगढ़ के विकास कार्य में विभागीय कर्मचारियों की मनमानी हो या फिर जनसमस्या निवारण,की कोई बात।सोशल मीडिया प्लेटफार्म लोगों के लिए दवाई की तरह काम कर रही है। बीते दिनों छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी समेत वर्तमान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को खैरागढ़ में चल रहे मनमानी की लिखित शिकायत सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर और व्हाट्सएप के माध्यम से दिया गया था, जिसमें विभागीय अधिकारी/कर्मचारी समेत तमाम छोटे से लेकर बड़े लापरवाही और मनमाने तरीके से संचालित हो रहे सभी विभागीय कार्यों की स्थिति के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से बताया गया था,जिसका असर तत्काल देखने को मिला।

बीते दिनों खैरागढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पेंड्रिकला निवासी भुवन विश्वकर्मा के द्वारा सबसे पहले अपनी समस्या बताई थी की काफी समय से तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पाया है।जिस कारण न आधार कार्ड बना है और ना ही राशन कार्ड में नाम जुड़ पाया है।और ना ही पंचायत के काम हो पा रहा था जिसके चलते काफी समय से परेशानी झेल रहा था,आए दिन भुवन विश्वकर्मा के घर परिवार जनों के बीच वाद विवाद होता रहता था।
अतः मुझे उपरोक्त बातों की जानकारी के बाद तहसील कार्यालय से पुष्टि करने के बाद,समस्त बातों की जानकारी देते हुए,लिखित शिकायत सीधे खैरागढ़ जिला कलेक्टर श्री चंद्रकांत वर्मा के व्हाट्सएप नंबर पर भेजा था एवं साथ ही वर्तमान मुख्यमंत्री वा  पूर्व मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी भेज दिया था। जिसके बाद 15 दिनों के भीतर ही जन्म प्रमाण पत्र, बच्चे का आधार कार्ड, गैस कनेक्शन बनकर तैयार हो गए थे। व राशन कार्ड के फॉर्म भी जमा हुए हैं अभी बनना बाकी है।

इसी तरह गांव के खोमलाल साहू ने 1 वर्ष पूर्व से अपने परिवार के तीन बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए दिए थे,जिसकी किसी प्रकार की जानकारी ही नहीं थी,जिस फॉर्म की रिसिप्ट लेने के बाद संबंधित विभाग तहसील कार्यालय से जानकारी लेने पर पता चला की तहसील कार्यालय के ऑपरेटर की मनमानी के चलते जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा था।जिसकी ऑनलाइन लगे आपत्ति कॉपी को दिनांक समेत स्क्रीन शॉट निकालकर सीधे कलेक्टर महोदय को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजने के बाद, दूसरे दिन तत्काल अस्थाई जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया।

वहीं पेन कार्ड बनाने के लिए हितग्राही छगन साहू ने एक वर्ष पूर्व ही खैरागढ़ स्थित चॉइस सेंटर में आवेदन भरे थे लेकिन चॉइस सेंटर वाले की लापरवाही के कारण पेन कार्ड आवेदन में गलत मोबाइल नंबर डालने के कारण पेन कार्ड बनाने के बाद भी डाउनलोड नहीं हो पाया था,चार दिन दौड़ धूप करने में बाद मुस्कील से पैन कार्ड बनवा पाया था। तत्पश्चात पासबुक बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में खाता खुलवाया एक साल से उपर हो जाने के बाद भी बैंक मैनेजर के द्वारा पासबुक नहीं दिए गए थे। दो सप्ताह तक चक्कर लगाने के बाद पब्लिक ऐप में खबर लगाने के दूसरे दिन बाद मैनेजर ने खुद ही आवेदक को शाम चार बजे बैंक बुलाकर पासबुक सौंप दिया था।             
आवेदक छगन साहू का जॉब कार्ड और राशन कार्ड में भी पंचायत कर्मियों की मनमानी देखनी को मिली।
यह की हितग्राही/आवेदक छगन साहू का सीएम आवास योजना में नाम आने के बाद एक किस्त तो मिल गया है लेकिन छगन लाल के शामिल आवेदन में, पड़ोसी फिरनता मंडावी का जॉब कार्ड शामिल किया गया था, जानकारी जनपद पंचायत स्थित आवास शाखा में जाने से हुआ। तत्पश्चात इस संबंध में आवेदन शामिल करने वाले कर्मचारी रोजगार सहायक से इस संबंध में बहस भी हुआ था।
तत्पश्चात इन सारी बातों की जानकारी पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी को सोशल मीडिया के माध्यम से दिया गया था, जिसके तुरंत बाद जॉब कार्ड ऑनलाइन बनकर तैयार हो गया,लेकिन अबतक जॉब कार्ड मिला ही नही है। इसके पहले रोजगार सहायक के द्वारा 4 महीनों से गुमराह करके रखा था।वही आवेदक की साथ ही राशन कार्ड को केवाईसी करने के बजाए,ग्राम पेंडरीकला सरपंच के द्वारा जनपद पंचायत में बड़े पहचान होने के कारण निरस्त करवा दिया गया है।जिसे पुनः नए राशन कार्ड बनाने हेतु आवेदन अभी लंबित है।

ऐसे अनेकों मामले है जिनमे ग्रामीणों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।जिनमे स्ट्रीट लाइट, जलजीवन के कार्य अधूरे होने के कारण पानी के लिए सड़क क्रॉस करके जाना पड़ता है जिससे आए दुर्घटना का डर बना रहता है।कई पात्र हितग्राहियों के राशन कार्ड ही नही बन पाया है, तो कहीं पात्रता होने के बाद भी निशुल्क राशन के स्थान पर 10 रुपए किलो वाला राशन कार्ड बना दिया गया है। तो कहीं बन रहे आवास योजना के हितग्राहियों का आवास की जियो टैग नहीं हो पाया है। 

इन सब समस्याओं से निपटने के लिए तथा विभागीय भ्रष्ट कर्मचारियों को सबक सिखाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म महत्वपूर्ण योगदान दिया है,उम्मीद है आगे भी सोशल मीडिया माध्यम से समस्या समाधान होता रहेगा।






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