ग्राम पंचायत भरनाभाट के आश्रित ग्राम डुमरघुंचा में दिख रहा सरकारी कार्यों में मनमानी,
ग्राम पंचायत भरनाभाठ के आश्रित ग्राम डुमर्घुंचा में हुआ बड़ी लापरवाही पंचायत की मिलीभगत से हुआ गड़बड़ी
"स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार"
*दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)*
बालोद–01 सितम्बर 2022
भरनाभाट/डूमरघुंचा: एक जानकारी के लिए दो बार लगाया गया RTI आवेदन में हुआ गड़बड़ी का खुलासा, यह की ग्राम पंचायत भरनाभाट अंतर्गत आने वाले ग्राम डूमर्घुंचा में वर्ष 2020–21 में हुए ग्राम सभा की प्रतिलिपि की जानकारी ग्राम पंचायत में आरटीआई के तहत मांगी गई थी।जिसमें पहले आवेदन पत्र सेवाराम यादव के द्वारा लगाया गया था। जिसमें ग्राम पंचायत में हुए ग्राम सभा 2021 की जानकारी मांगी गई थी। जिस पर ग्रामीणों के द्वारा पंचायत को सूचित किया गया था, की सेवाराम यादव के द्वारा 15 से 20 डेसिमिल अवैध जमीन पर कब्जा किया गया है जिसे हटाने हेतु ग्राम पंचायत को आवेदन पत्र के माध्यम से अवगत कराते हुए अवैध कब्जा हटाने हेतु, पंचायत सचिव एवं सरपंच को ग्राम सभा के माध्यम से पेश किया गया था। जिसकी प्रतिलिपि हेतु सेवाराम यादव के द्वारा ग्राम पंचायत को आवेदन पेश किया गया था जिन पर ग्रामीणों के द्वारा हस्ताक्षर आवेदन में संतोष निषाद, रमेश निषाद, हीरालाल निषाद, चुम्मन निषाद, दल्ली राम साहू, गन्नू राम साहू, एवम अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर शामिल थे।
वहीं दूसरा आवेदन की प्रतिलिपि की जानकारी डीकेश साहू के द्वारा मांगा गया जिसमें आवेदन पेश कर्ता के नाम में उक्त में से सिर्फ चार ही एल लोगों का नाम शामिल था। आरटीआई से मांगी जानकारी में एक ही आवेदन पर दो तरह के अलग अलग प्रतिलिपि देखकर संदेह की स्थिति बनी हुई है।
उक्त मामले में खास बात यह है की जो आवेदन ग्रामीणों ने ग्राम सभा के माध्यम से पेश किया था, उसमें सेवाराम के द्वारा 15 से 20 डिसमिल अवैध कब्जा हटाने की बात लिखी हुई थी, जो सरासर झूठ है ना ही सेवाराम यादव के द्वारा 15 से 20 डेसिमिल जमीन पर कोई कब्जा नहीं किया गया है। और न ही उतनी जमीन सेवाराम यादव के घर के आसपास मौजूद है।
झूठे आवेदन देकर पंचायत पदाधिकारियों को गुमराह करके मकान के बाउंड्री वॉल को तोड़ कर ग्रामीणों के द्वारा घेराव किए पत्थरों को अवैध कब्जा बताते हुए सेवाराम यादव तथा खेमीन बाई के हक की भूमि से ईंट पत्थर उठाकर ले जाया गया।
वहीं दूसरा आरोप पीड़ित पक्षों के द्वारा यह भी लगाया गया है की दूसरा आवास जो बनना था, जिसका रकबा 900 स्क्वायरफिट जमीन पर बनना था जिसका खसरा क्रमांक 114/2 की भूमि का टुकड़ा 30x30 sqf भूमि पर उसे भी गौठान जाने का रास्ता बताकर मैटेरियल को भूमि स्वामी खेमिन बाई को बिना सूचना दिए ही मैटेरियल उठाकर ले गया।
उक्त मामले में ग्रामीणों पर आरोप यह है की उपरोक्त जमीन को 2008 में सरकारी योजना के अंतर्गत भूमिहीन गरीब परिवारों को भाजपा सरकार रमन सिंह के द्वारा आबंटित किया गया एवम पट्टा भी प्रदान किया गया था।
जिसे ग्रामीणों ने स्वयं जगह चिन्हांकित कर भूमि का सीमांकन मकान बनवाने हेतु करवाए थे, अब कुछ ग्रामीणों के द्वारा यह कहा जा रहा है की ग्रामीणों को इसकी कोई जानकारी नहीं है एवम ग्रामीणों के द्वारा किसी भी प्रकार से भूमि का आबंटन नहीं किया गया है। जबरदस्ती कब्जा कर लिया गया है। अब ये कैसे संभव है की एक महिला जो रोजी मजदूरी करके अपना जीवन यापन कर रही है वो अवैध रूप से 900 sqf. भूमि को कैसे कब्जा कर सकती है।
ग्राम सभा पर आरोप यह है की जांच अधिकारियों को गलत जानकारी देते हुए मामले से गुमराह किया गया था,इसी बीच उसी खसरे की भूमि में प्रधानमंत्री आवास के लिए नाम अनुमोदित हो चुका था, लेकिन इसी तरह कमिशन खोरी और गलत जानकारी देने के कारण आवास योजना का भी लाभ हितग्राही को नहीं मिल पाया। जिसकी आरटीआई जांच के दौरान गड़बड़ी पाया गया।
गड़बड़ी करने वाले सचिव का तबादला होने के बाद भी प्रशासन अभी भी कोई कठोर कारवाई नहीं की।
मामला अबतक वहीं का वहीं लटका हुआ है।
जबकि भूमि से बेदखल आवास से वंचित एवम किसी भी सरकारी कार्यों में समानता पूर्वक व्यवहार हितग्राही के पक्ष में नहीं है।






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