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बुधवार, जून 15, 2022

कमीशनखोरी और कालाबाजारी का ऐसा खौफ, "चाहे सरकारी भूमि के रकबे हड़पे चाहे,सरकारी योजना की राशि गटके,या गरीबों के पट्टे,ग्रामीण दल्ले..."



कमीशनखोरी और कालाबाजारी का ऐसा खौफ,

"चाहे सरकारी भूमि के रकबे हड़पे चाहे,सरकारी योजना की राशि गटके, या गरीबों के पट्टे,ग्रामीण दल्ले..."



*स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार*
*दैनिक हिंदी वेब मीडिया बालोद (छ.ग.)*


देवरी/डूमरघुंचा 

15/06/2022

कमीशन खोरी का नया मामला सामने आया है, इन दिनों ग्राम पंचायतों में कुछ कमीशन खोर पत्रकार वास्तविकता को छुपाने के लिए एवम भ्रष्टाचारी को बढ़ावा देने के मंसूबे से खुलकर कमीशन खोरी करने में लगे हुए हैं। 

इसी तरह के मामले ग्राम पंचायत सचिव एवं ग्राम प्रमुखों से पैसे वसूलने में लगे हैं। तथा कुछ जगहों में देखा गया है की सरकारी दफ्तरों में घोटाले करने के मंसूबे से, सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रयोग कर रहे हैं जो वास्तविक घटना है उसे सार्वजनिक करने के बजाए उसे छुपाने में लगे हुए हैं। बल्कि वास्तविक घटना को मरोड़कर कुछ पत्रकार घटना की स्पष्टता को छुपाकर रखते है। जैसे इन दिनों देवरी बंगला क्षेत्र में प्रतिमाह कुछ पत्रकारों का दौरा राशि बटोरने के लिए ही होता है ऐसा कुछ पंचायत सचिवों और ग्राम प्रमुखों से सुनने को मिल रहा है जिनमें खेरथा, देवरी, भरनाभाट, राघोनावागांव, सहित आसपास के अन्य ग्राम पंचायत शामिल हैं। वास्तविकता छुपाने के लिए यह पत्रकार सूचना की जानकारी लेने के बाद मोटी राशि की वसूली भी करने में लगे होते हैं। संविधान के सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में पारित अधिकार का दुरुपयोग, आजकल पत्रकारों की वसूली करने का मुख्य औजार बन चुका है। ऐसे में देखा जाए तो भ्रष्टाचार उजागर होने के स्थान पर दोगुना बढ़ते जाता है। समाज में व्याप्त बुराई कम होने के बजाए दोगुनी रफ्तार पकड़ लेती है। देखा जाए तो ऐसे पत्रकारों की वजह से अच्छे पत्रकारों को भी फील्ड में जाने से पहले ही खतरों का सामना 







करना पड़ता है।भ्रष्ट लोगों की तादाद इतनी बढ़ गई है की अच्छे पत्रकारों को भी आजकल धमकियां खुलेआम मिल रही है। मीडिया कर्मचारियों को हीनता की दृष्टि से देखा जाने लगा है। खुलेआम जेल में ठूंस दी जा रही है, सरकार पत्रकार के हित में कानून बनाने की घोषणा तो कर देती है लेकिन उसे अमल नहीं करती, शराब बंदी की घोषणा तो कर देती है सरकारें लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाती। पत्रकार के साथ साथ मीडिया कानून भी लाने की कृपा करें सरकार।

 ऐसे ही ताजे मामले देवरी क्षेत्र के भरनाभाट पंचायत के आश्रित ग्राम डूमरघूंचा में देखने को मिला। यहां खुलेआम धड़ल्ले से वृक्षों की कटाई तो हो रही है, सरकारी भूमि पर कब्जा दबंगों के द्वारा की गई है, लेकिन इसका सीमांकन होने के बाद भी रकबे की गलत जानकारी देने की वजह से ग्राम  के कुछ लोगों की लापरवाही के चलते रकबे में गड़बड़ी अब तक चलती रही है। लकड़ी दलालों की व्यापार खुलेआम बेधड़क चल रही है, जिसकी शिकायत भी की गई लेकिन जिम्मेदार ऑफिसर के कमिशन खोरी ही शायद बीच में आड़े बने हुए हैं।जिस वजह से अबतक लकड़ी दलालों एवम बेजा कब्जा धारियों की मनमौजी और खुद को मूल ग्राम निवासी का भय बताकर मनमौजी धौष जमाए बैठे हैं। अन्यथा 21 वी सदी में भी लोगों में  रौब जमाकर,अपने ही ग्राम को अंधेरे में देखना  कौन चाहेगा। आज भी ग्रामीणों को पहुंच मार्ग से गुजरने के लिए कच्ची मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। कमिशन खोरी के कारण वास्तविकता छुपाई जा रही है। ग्राम का विकाश भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। गली में  अभी भी सीमेंटीकरण नहीं हों पाया है। ग्राम विकास के लिए राशि का आबंटन तो हो चुका है लेकिन अबतक ग्राम के गलियों में सिमेंटीकरण नहीं हों पाया है। इसके पीछे कारण यही है मोटी रकम वसूली करना। एवम पत्रकारिता का  दुरुपयोग कर बदनाम करना।

बात यहीं पे खतम नहीं होती अगर ये पत्रकार अच्छे कर्म करते या अच्छे नियत के रहते तो शायद आज मीडिया का हाल एवम समाज में पत्रकारों के प्रति लोगों का नजरिया कुछ और होता लेकिन चौथे स्तंभ कहें जाने वाले इस संविधान के महत्वपूर्ण अंग को बदनाम करने में खुद चौथे स्तंभ के ही मुख्य अंग इस पर अहम भूमिका अदा कर रही है। जो अपने ही अंगों के साथ भेदभाव को बढ़ावा दे रही है। धार्मिकता के दंगे एवम जात–पात के भेद के पीछे इनका यही मुख्य कारण है। वृक्षों की कटाई खुलेआम हो रही।

भूमि में अतिक्रमण दंगाई लोग खुलेआम कर रहे हैं। मूल निवासियों के साथ लूट–पाट छल और मूल निवासियों के साथ भेदभाव कर डरा धमकाकर जमीन लूट ले रहे हैं। और प्रशासन को ये सब दिख नहीं रहा। कभी फुर्सत मिले तो एक बार सैर जरूर करिए इस अंधकार भरे गांव का समय मिले तो कमीशन खोरी की सारी जड़ें देखने जरूर आएगा।

अरे साहिब! कितने मिठबोले हो नीम जैसे कड़वाई में भी मीठापन आ जाता है। ना जाने कौन सी राज छुपी है यहां की मिट्टी में साहिब झूठ बोलते हैं तो पत्रकार ही बिक जाते हैं।



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