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मंगलवार, मई 31, 2022

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष अमित बघेल को हुई जेल

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष अमित बघेल को हुई जेल आईपीसी की धारा  295 (A) के तहत की गई कारवाई


*स्वतंत्र समाचार स्वतंत्र विचार*
दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)
31 मई 2022










बालोद–गुण्डरदेही बालोद बंद को लेकर हुए दुकानदारों से मारपीट वा जैन समाज के धर्म गुरुओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाले छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष अमित बघेल के खिलाफ पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश के जैन समाजों में आक्रोश थी, छत्तीसगढ़ के जैन समाजों के द्वारा आरोपी अमित बघेल के उपर करवाई हेतु बालोद कलेक्टर जन्मेजय महोबे को आवेदन के माध्यम दिल संज्ञान दिया गया था, जिस पर करवाई करते हुए, आरोपी अमित बघेल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था,धारा  295 (ए) आईपीसी के तरत कारवाई करते हुए। आरोपी को सरगुजा जिले के हसदेव से गिरफ्तार कर लाया गया,

बालोद पुलिस के द्वारा आरोपी अमित बघेल को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। अमित बघेल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस प्रशासन वा छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के सदस्यों के बीच आपसी गहमा गहमी बढ़ चुकी है जिसके चलते बालोद कोतवाली थाने वा जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। बता दे की छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना छत्तीसगढ़ में ऐसा संगठन है जो छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के हित में तो कार्य करती है पर कहीं न कहीं इनका तरीका असंविधानिक अमानवीय और अनैतिक कार्यों को खुलेआम अंजाम देती है। जिस पर काफी समय से पूर्व में भी ऐसी घटना जिनमे कोलर घटना वा कई छोटी छोटी घटना को संगठन के बल पर अंजाम दे चुकी है।

दूसरे पक्षीय में जैन समाज के लोगों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना संगठन को निशाना साधकर इस घटना के संबंध में कहा है की, 

सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि प्रदर्शनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक रूप माना जा सकता है जब तक कि वे सार्वजनिक आदेश का उल्लंघन न करें। हालांकि अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में हड़ताल करने से इनकार कर दिया। अनुच्छेद 19 भारत के किसी भी निवासी को हड़ताल, बंद या चक्का जाम आयोजित करने की स्पष्ट अनुमति नहीं देता है। ये रूप या तो अहिंसक या शांतिपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन मूल अधिकारों की गारंटी नहीं है। भाषण  और अभिव्यक्ति शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के इकट्ठा हों संघ या संघ बनाना यहां तक ​​कि बीआर अंबेडकर ने भी कहा था कि इस शर्त के तहत सत्याग्रह का विचार शून्य होगा, "जहां संवैधानिक तरीके खुले हैं, वहां इन असंवैधानिक तरीकों का कोई औचित्य नहीं हो सकता।"



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