पेंड्रीकला में मूलभूत सुविधा ठप,पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण
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*दैनिक हिंदी वेब मीडिया (छ.ग.)*
27/11/2025
पेंड्रीकला/खैरागढ़ एक ओर सरकार ग्रामीणों की स्थिति सुधारने के लिए तरह तरह की योजनाएं चलाती है।वही ग्रामीणों में कुछ ऐसे रसूखदार लोग होते है जिनको,सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधा जो गरीबों और ग्रामीणों को मिलने वाली योजनाओं के लाभ चुभने लगती है।ये रसूखदार ज्यादातर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में देखने मिल जाते हैं।
ये ऐसे समाज में छुपे राजनीतिक दलाल होते हैं जो जनहित का दिखावा तो ऐसे करते हैं मानो समाज के यही सबसे उत्तम व्यक्ति हैं। इन दलालों को राजनेताओं से समर्थन प्राप्त होते हैं। जिनकी आड़ में ये गांव में हिंसा, तानाशाह और आंतरिक अशांति फैलाने का काम करते हैं। और सबसे खास बात इन सामाजिक दलालों के व्यक्तिगत पार्टीवादी समर्थक निजी वकील भी होते हैं।
ऐसे समाज के दलालों को पहचान कर राजनीतिक कार्य,पंचायती कार्य तथा सामाजिक कार्यकर्ता के पद से हटाने की जरूरत है। क्योंकि ये इतने कट्टर पार्टीवादी दलाल होते हैं जिनमें सामाजिक हिंसा की नीति इनके अंदर कूट कूट के भरी होती है। सामाजिक ग्रामीणों में तनाव इनको आम बात वा मजेदार लगने लगती है।
सरकारी योजना के लाभार्थियों से ये अंदर ही अंदर आंतरिक द्वेष पाल के रखे रहते हैं।परिणाम स्वरूप ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है। इसका ताजा उदाहरण खैरागढ़ के पास लगे ग्राम पेंड्रीकला में देखने को मिल जायेगा।जहां सरकार मूलभूत सुविधा तो दिए है लेकिन रसूखदार लोगों को यह चुभने लगी है। जानकर हैरानी होगी कि यहां जल संसाधन विभाग के द्वारा जल जीवन मिशन अंतर्गत पेयजल की सुविधा दी गई है। जिसको पूरे गांव में पानी पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत को चाबी सौंप दी गई है।
सरकार द्वारा भरसक प्रयास किया गया और सुविधाएं ठीक से चल भी रही थी। लेकिन साथ ही सरकार इतने ही सुविधा देकर शांत नही बैठे प्रयास था की सड़क दुर्घटना कम हो इसके लिए ग्रामीणों की मांग पूरी करने हेतु सड़क चौड़ीकरण के काम भी शुरू किए गए लेकिन दुर्भाग्यवश ये हुई की सड़क चौड़ीकरण हेतु जेसीबी ऑपरेटर के द्वारा किनारे में खुदाई करने के दौरान जल जीवन मिशन अंतर्गत बिछाए गए पाइप को भी तोड़ दिया गया। कारणवस ग्रामीणों को मिल रही पेय जल की संकट सामने आ गई।प्रशासन द्वारा लगातार कोशिश किया जा रहा है की ग्रामीणों को मिलने वाली पेयजल की सुविधा पूर्ववत चालू हो जाए। लेकिन आज 15 दिन बीत चुके हैं। पूरा पाइप जोड़ना तो दूर की बात और समस्या बढ़ती जा रही है। जेसीबी ऑपरेटर से भूलवस दो चार जगह को ही तोड़ा गया था। लेकिन अबतक समस्या दस से बारह जगह होने की जानकारी मिल रही है। कही हार्वेस्टर फंसने से पाइप फट गया है तो कहीं रिपेयरिंग ठीक से नही होने की वजह से पानी लीक होने लगा है। इसके बाद और भी कही कही समस्या है।बढ़ते समस्या को देखते हुए समझ आ रहा की ये पेयजल की समस्या आकस्मिक नही यह जान बूझकर रसूखदारों या फिर शरारती लोगो के द्वारा अथवा असामाजिक तत्वों या दलालों के द्वारा किया जाने वाला समस्या है।अब इसमें पीएचई विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग भी क्या कर सकता है जो पाइप तोड़ी गई उसे ठीक करवा रहा है,उसके बाद और पाइप का टूटते जाना,आंतरिक द्वेष के कारण तोड़ा जाने वाला समस्या है,ताकि कमिशन खोरी करते बने। अगर समस्या पूरे ग्रामीणों को होती तो प्रसासन से गुहार लगाते लेकिन ऐसा नहीं लग रहा की शायद समस्या पूरे ग्रामीणों को नही हो रहा होगा। कुछ ग्रामीण सशक्त हैं जिनके घर बोर सुविधा मौजूद है। उन्हें शायद कोई पेयजल की असुविधा नहीं हो रही होगी। जिसके चलते प्रशासन से गुहार लगाना या कारवाई करना उचित नही समझ रहे हैं।
वही कुछ ग्रामीण इतने आक्रोशित है जो जल जीवन मिशन में बिछे पाइप लाइन को तोड़ देने वा सरकारी मोटर तक को जला देने की धमकी दे डाली।इन ग्रामीणों के आक्रोश लाज़मी है जिन्हें वाकई पेय जल की समस्या है आक्रोश तो आम बात है। प्रशासन को इस ओर विशेस ध्यान आकृष्ट करने की जरूरत है।ताकि दलालों को सबक सिखा सके,एवं जनहित में कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।
एवं ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा बनी रहे।
ये ऐसे समाज में छुपे राजनीतिक दलाल होते हैं जो जनहित का दिखावा तो ऐसे करते हैं मानो समाज के यही सबसे उत्तम व्यक्ति हैं। इन दलालों को राजनेताओं से समर्थन प्राप्त होते हैं। जिनकी आड़ में ये गांव में हिंसा, तानाशाह और आंतरिक अशांति फैलाने का काम करते हैं। और सबसे खास बात इन सामाजिक दलालों के व्यक्तिगत पार्टीवादी समर्थक निजी वकील भी होते हैं।
ऐसे समाज के दलालों को पहचान कर राजनीतिक कार्य,पंचायती कार्य तथा सामाजिक कार्यकर्ता के पद से हटाने की जरूरत है। क्योंकि ये इतने कट्टर पार्टीवादी दलाल होते हैं जिनमें सामाजिक हिंसा की नीति इनके अंदर कूट कूट के भरी होती है। सामाजिक ग्रामीणों में तनाव इनको आम बात वा मजेदार लगने लगती है।
सरकारी योजना के लाभार्थियों से ये अंदर ही अंदर आंतरिक द्वेष पाल के रखे रहते हैं।परिणाम स्वरूप ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है। इसका ताजा उदाहरण खैरागढ़ के पास लगे ग्राम पेंड्रीकला में देखने को मिल जायेगा।जहां सरकार मूलभूत सुविधा तो दिए है लेकिन रसूखदार लोगों को यह चुभने लगी है। जानकर हैरानी होगी कि यहां जल संसाधन विभाग के द्वारा जल जीवन मिशन अंतर्गत पेयजल की सुविधा दी गई है। जिसको पूरे गांव में पानी पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत को चाबी सौंप दी गई है।
सरकार द्वारा भरसक प्रयास किया गया और सुविधाएं ठीक से चल भी रही थी। लेकिन साथ ही सरकार इतने ही सुविधा देकर शांत नही बैठे प्रयास था की सड़क दुर्घटना कम हो इसके लिए ग्रामीणों की मांग पूरी करने हेतु सड़क चौड़ीकरण के काम भी शुरू किए गए लेकिन दुर्भाग्यवश ये हुई की सड़क चौड़ीकरण हेतु जेसीबी ऑपरेटर के द्वारा किनारे में खुदाई करने के दौरान जल जीवन मिशन अंतर्गत बिछाए गए पाइप को भी तोड़ दिया गया। कारणवस ग्रामीणों को मिल रही पेय जल की संकट सामने आ गई।प्रशासन द्वारा लगातार कोशिश किया जा रहा है की ग्रामीणों को मिलने वाली पेयजल की सुविधा पूर्ववत चालू हो जाए। लेकिन आज 15 दिन बीत चुके हैं। पूरा पाइप जोड़ना तो दूर की बात और समस्या बढ़ती जा रही है। जेसीबी ऑपरेटर से भूलवस दो चार जगह को ही तोड़ा गया था। लेकिन अबतक समस्या दस से बारह जगह होने की जानकारी मिल रही है। कही हार्वेस्टर फंसने से पाइप फट गया है तो कहीं रिपेयरिंग ठीक से नही होने की वजह से पानी लीक होने लगा है। इसके बाद और भी कही कही समस्या है।बढ़ते समस्या को देखते हुए समझ आ रहा की ये पेयजल की समस्या आकस्मिक नही यह जान बूझकर रसूखदारों या फिर शरारती लोगो के द्वारा अथवा असामाजिक तत्वों या दलालों के द्वारा किया जाने वाला समस्या है।अब इसमें पीएचई विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग भी क्या कर सकता है जो पाइप तोड़ी गई उसे ठीक करवा रहा है,उसके बाद और पाइप का टूटते जाना,आंतरिक द्वेष के कारण तोड़ा जाने वाला समस्या है,ताकि कमिशन खोरी करते बने। अगर समस्या पूरे ग्रामीणों को होती तो प्रसासन से गुहार लगाते लेकिन ऐसा नहीं लग रहा की शायद समस्या पूरे ग्रामीणों को नही हो रहा होगा। कुछ ग्रामीण सशक्त हैं जिनके घर बोर सुविधा मौजूद है। उन्हें शायद कोई पेयजल की असुविधा नहीं हो रही होगी। जिसके चलते प्रशासन से गुहार लगाना या कारवाई करना उचित नही समझ रहे हैं।
वही कुछ ग्रामीण इतने आक्रोशित है जो जल जीवन मिशन में बिछे पाइप लाइन को तोड़ देने वा सरकारी मोटर तक को जला देने की धमकी दे डाली।इन ग्रामीणों के आक्रोश लाज़मी है जिन्हें वाकई पेय जल की समस्या है आक्रोश तो आम बात है। प्रशासन को इस ओर विशेस ध्यान आकृष्ट करने की जरूरत है।ताकि दलालों को सबक सिखा सके,एवं जनहित में कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।
एवं ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा बनी रहे।

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