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मंगलवार, सितंबर 07, 2021

सच बोलने पर घर तोड़ दिए।





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मेरा घर नहीं बना तो समझ लेना की एक एक रुपए का भी हिसाब आपको देना पड़ेगा डायरेक्ट नहीं तो इनडायरेक्ट ही सहीं पर हिसाब तो लेकर ही रहूंगा। जिस तरह मेरे घर को तोड़े हो जबतक मैं हूं बेईमानी करने से पहले एक बार सोच लेना, मेरे ख्याल से  धर्मांतरण वाले मुद्दा में हमें स्वयं अपने विवेक अनुसार कार्रवाई करना चाहिए चाहे किसी भी धर्म जाति या वंश के हो किसी को जबरदस्ती किसी देवी देवता या खुदा अल्लाह परमेश्वर गार्ड के नाम पर मारपीट या धर्मांतरण जैसे शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हिंदुस्तान में सबको समान अधिकार प्राप्त है किसी भी धर्म को मान सकते हैं धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। हमें यह ध्यान में रखकर कानून का एवं समाज के हित में रखते हुए उचित सामंजस्य बरतना चाहिए। बड़े से बड़े विवाद को छोटे से इशारे से निपटाया जा सकता है। एक छोटे से वार्तालाप में भी बात को सुलझाया जा सकता है जरूरी नहीं कि किसी की संपत्ति पर दखलअंदाजी किया जाए या तोड़फोड़ करके या किसी प्रकार से हिंसा करके ही धर्मांतरण को रोका जा सकता है। जबकि इसके विपरित प्रभाव देश में पड़ते हैं इस बात का हमें ध्यान रखकर फैसले लेने चाहिए,दंगे से आंतरिक अशांति एवम जानमाल का नुकसान ही हुआ है, तथा इससे सिर्फ और सिर्फ देश के अंदर आंतरिक अशांति ही बढा है, इस बात का हमें ध्यान रखना चाहिए की अगर देश के अंदर ही दंगे होते रहे मारपीट झगड़ा लड़ाई होते रहे तो सामान्य सी बात है पड़ोसी भी मौके की ताक में हैं वह बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे मौके नहीं गवाएंगे। इसलिए हमें यह बात नहीं भूलना चाहिए कि हम भी देश के नागरिक हैं हमारा भी कर्तव्य है कि देश की सुरक्षा में जिम्मेदारी जरूर निभाएं, एवं देश की शांति सौहार्द को बरकरार रखें ताकि हमारा आने वाला कल भी आज से बेहतर और सही हो। दंगे फैलाना दंगाइयों का काम है जाति व धार्मिक भेदभाव करना एवं समाज को टुकड़े में बांटना देश के अंदर मतभेद पैदा करके राजनीति में सीटें हासिल करना यह सब देश के अंदर छुपे हुए गद्दारों का काम है जो हिंदुस्तानी बनकर हिंदुस्तान को ही खोखला कर रहे हैं। धार्मिक हिंसा फैलाने में लगे हुए हैं। बीजेपी और कांग्रेस के चक्कर में कई करोड़ों अरबों रुपयों को यूंही गरीबों के योजना के नाम पे गबन कर रहे हैं।लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है,गरीबों की झोपड़ी आज भी झोपड़ पट्टी में ही गुजर रहा है।जबकि हर साल एक योजना के नाम पे जैसे राजीव गांधी आवास,प्रधानमंत्री आवास के नाम पे हर साल पैसे निकल रहे हैं लेकिन आज तक कहीं मकान बन ही नहीं रह है।तो फिर ये पैसे जा कहां रहा है। पेंशन के नाम पे कई करोड़ों रुपए गरीबों के खाते को मिलने वाली राशि आजभी जनपद एवम जिला पंचायत तक आते आते खत्म हो रहे हैं लेकिन अबतक योजना का लाभ पूरा हुआ ही नहीं भला ये बताए सरकार की इस योजना के लिए कितने लोगों  को क्या क्या लाभ हुआ है जो आजतक लोग गरीब के गरीब ही रह गए हैं। क्या तकलीफ हो जाता है। यह भी बता देता हूं यह गुटबाजी और संगठन मिलकर के आपस में दंगे करवाकर देश की आंतरिक शांति एवं सरलता का मजाक बना कर खुद तो इनके सिद्धांत बड़े खराब है इनको जब सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है  तो लोगों के बीच दंगे करवाकर डरा धमका कर लोगों से जबरदस्ती धर्मांतरण के आरोप में मारपीट करवा कर अपनी वोटिंग बढ़ाना चाहते हैं ।जबकि जनता चाहे तो इन दंगाइयों को रातो रात लाश के ढेर में बदल सकता है वैसे भी इन दंगाइयों के अब दाल गलना अब बंद हो चुके हैं। पॉलिटिक्स सपोर्ट देने के लिए अब कोई बचा ही कन्हा है, हम जनता इतना समझदार हो चुके है कि दंगाइयों के चंगुल में अब फंसने वाले नहीं हैं। उनके इशारे से चलने वाले हम नहीं है। उनको अब बीजेपी कांग्रेस का खेल समझ आ गया है यह अपना नेता उसी को चुनते हैं जो वाकई जनता के हित में काम करें तथा अपनी जेबें न भरे बल्कि समाज के हित में काम करें निस्वार्थ भाव से। ऐसा नहीं कि खाली मारपीट या गुंडागर्दी करके ही लोगों से वोट लेकर नेता बन जाए और अपनी जेबें भरते रहे।






सच बोलने पर घर तोड़ दिए,अब घर तोड़ने पर तुम्हारा सर फोड़ देंगे...सरफिरा हूं साहिब अब गिड़गिड़ाना छोड़ दिए, शांत था लेकिन अब और नहीं। गलती पुलिस कांस्टेबल से हुई थी,सुधार भी पुलिस स्टेशन में ही होगी। मौका दे दिया था लेकिन सुधार नहीं सके। भ्रष्टाचार बंद करों, या फिर जीना छोड़ो।

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