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रविवार, सितंबर 05, 2021

हारा वही है जो लड़ा नहीं

 



हारा वही है जो लड़ा नहीं क्या लगता है कि हम इतनी जल्दी हार जाएंगे नहीं साहेब हम मजदूर लोगों में जो खून रहता है ना थोड़ा स्ट्रगल स्ट्रेंथ और शक्ति से भरा रहता हैं। इसलिए हम लोग हारते नहीं लड़ते हैं। नहीं कभी हारे थे और नहीं कभी रुके हैं ना रुकेंगे। आपको क्या लगता है आरक्षण के नियम हम पर ही लागू होगा गांव से बहिष्कृत कर दोगे इसका मतलब क्या हम लोग ईमानदारी छोड़ दें आओ मैं बता दूं। लेन देन बातचीत करना बंद करवा दिए तो इसका मतलब क्या मजदूर लोग सर झुका कर जीना शुरु कर दें यह सब हमने नहीं सीखा साहिब अगर बदलना है तो अपने कानून अपने समाज के नीति नियम को बदलो हमें बदलने की जरूरत नहीं है हम ऐसे ही हैं। ऐसे ही रहना पसंद है, परिवार के हैं हमारा वंश साहू है। हमने यही सब सीखा है अन्याय के सामने झुकना नहीं भ्रष्टाचारी के सामने पैसे देना नहीं। अगर अन्याय करोगे तो हम बगावत करेंगे। हम डरने वाले परिवार से नहीं। हमारे साथ अगर अन्याय करोगे तो उसका जवाब भी देंगे हमें अब तक मेहनत किए हैं मेहनत करेंगे और सीना तानके खड़े थे सीना तान के चलेंगे हमने झक नहीं मराए हैं। जो आपके अन्याय के सामने झुक जाए जितना आप ने लूटे हैं गांव में उससे ज्यादा हम लूट लेंगे जनता के लिए। आपको लगता है की इतना दिन तक जो चल रहा था वही चलेगा नहीं ऐसा नहीं होगा। ये क्यों भुल जाते हो की लोग जागरूक हो गए हैं तुम्हारी अंधकार अब नहीं चलेगी पुलिस को पकड़ बनाकर तुमने दंगाई किया एक बार जेल गए इसका मतलब अकड़ना शुरू ही कर दोगे मतलब क्या शेर बन गए नहीं तुम तो गीदड़ से कम नहीं तुम्हारी राजनीति गांव के भोलेभाले लोगों तक ही चलेगा अशिक्षित लोगों के सामने तक ही, पढ़े लिखे लोगों के सामने नहीं। तुम्हें लगता है दंगाई करके धार्मिक दंगे फैलाकर जातिवाद और हिंसा करके आगे बढ़ जाओगे। नहीं साहेब। तुम्हारा ये षडयंत्र हमारे सामने नहीं चलेगा। भोलेभाले लोगों को तुम कंट्रोल कर लोगे यह तुम्हारी मानसिकता गलत है की कीचड़ में पैदा हुए हो कीचड़ में ही खत्म हो जाओगे, कभी तुमने आगे के बारे में सोचा ही नहीं है तो आगे बढ़ोगे कहां से। जो जितना सोचता है। वो उतना ही और वैसे ही बनता है। तुमने लोगों के बारे में क्या सोचा है क्या नहीं ये तो तुम्हें वक्त ही बताएगा, ये हम नहीं बताएंगे। क्या हुआ जो गांव के लोगों को गुमराह करके आगे बढ़ने की सोच रहे हो। तुम्हें लगता है की कोई भी व्यक्ति अपनी आवाज बुलंद करके आगे बढ़ सकता है, ये तुम्हारी भूल है। तुम लोगों की वजह से आज समाज में व्याप्त कई प्रकार की बुराइयां संलिप्त है।जिसके कारण आज समाज के लोगों में मतभेद हो चुका है। ये जो तुम दंगे फैला रहे हो ना अंधकार को देखते हुए, ये कहीं और की नहीं बल्कि आपके ही वंशज का भविष्य खराब कर रहे हो और कुछ नहीं अगर कोई व्यक्ति अपनी आवाज उठाकर जीना सीख लेता है तो क्या कोई गुनाह कर दिया है। जो कोई अपनी बात रख रहे हैं उसे समाज से ही बहिष्कृत कर रहे हो, कहां तक सही है ये तुम्हें क्या लगता है, तुम जो करोगे वही होता रहेगा नहीं जनाब ऐसा नहीं है लोग क्या करते हैं क्या नहीं ये सब तो वक्त पे छोड़ दो। ये तो सरकारी कर्मचारी की बेईमानी है जो आज भी शासकीय भूमि पर बेजा कब्जा जमाए हुए हैं भरनाभाठ पटवारी और 


कोतवाल की अजीबो गरीब बयान सामने आया है की ऐसा तो सब गांव में रहता है।


कोतवाल की अजीबो गरीब बयान सामने आया है की ऐसा तो सब गांव में रहता है।एक तरफ भूमिहीन गरीब कृषि मजदूरों को भूपेश सरकार राजीव गांधी मिशन के नाम से आर्थिक सहायता राशि प्रदान कर रही है वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों को उकसाकर दंगाई करने के मामले सामने देखने को मिल रही है वहीं खुलेआम ग्रामीणों को गुमराह करने की दादागिरी भी लगातार सामने आ रही है। और ये सब कुछ जानकर भी पुलिस निठल्ले की तरह हाथ बांधकर देख रही है जानकारी होने के बावजूद कुछ नही कर पा रही है। अगर यही हाल रहा तो छत्तीसगढ़ को लूटने वालों के हाथ से कोई नहीं बचा सकता जनपद और जिला पंचायत में भी आजकल वही सब चल रहा है सब मिली भगत है जनाब तहसीलदार भी आजकल हाथ खड़े कर दिए हैं। ये जानकर भी की गांव में बेजा कब्जा करने वालों की कमी नहीं फिर भी कुछ कर नहीं कर पा रही है।जंगल की लकड़ियां खुलेआम काटा जा रहा है फिर भी कोई खास कारवाई नहीं किया गया, हम चाहते हैं, स्वक्ष भारत लेकिन बेईमानी अधिकारियों के खून में लिप्त है कैसे स्वक्ष हो जाएगा।

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