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औरत को समझना पुरुषों की बस में नहीं।
अक्सर जिंदगी उन्हीं को आजमाती है जिनमें कुछ बात होती है ये जो स्टोरी कही से सुनने में आता है अक्सर उसके पीछे काफी बातें छुपे रहती है। सच्चाई कुछ और रहता है और शोर कुछ और सुनाई देता है, उस इंसान की कोई कदर नहीं, जो जवाब हृदय के बदले दिमाग लगाके देते हों। कुछ बातों को भूलकर आगे बढ़ जाना जिंदगी होती है। लेकिन कुछ लोगों के संग के कारण हर बार वहीं के वहीं आना पड़ता है।ये जिंदगी नही होती।हमने 2013 से 2019 तक लगातार अकेले रहकर मुस्कील दौर को काटा है,ऊंचाई में चढ़ने के लिए स्ट्रगल करना पड़ता है, जो हमने अकेले झेला है,अब सब कुछ हो जाने के बाद अगर कोई हमारे कार्यों में दखल अंदाजी करे तो हमे बर्दास्त नहीं। कुछ लोग परमेश्वर के नाम पे किसी की परिवार तबाह करने में लगे रहते है जैसे सगुनी मामा,गांव में रहकर बेवजह हमारा कान भरा गया परमेश्वर और शैतान के नाम पे मारपीट हमसे की गई, बदनामी हमे किया गया जबकि हमने अपने मेहनत अपने हुनर के दम पर हासिल किए। किसी की दुवाओं और अहसानों से नहीं लेकिन हर बार जब जब मैंने कुछ आगे बढ़ना चाहा तब तब किसी न किसी ने रोकने की कोशिश ही की, अब इसमें गलती किस की थी हमारा या फिर रोकने वाले लोगों का ? सच ये है की गलती लोगों की नहीं समझने वालें उसी बूढ़ी की थी जिसने समय रहते समझने में बड़ी गलती की थी। अब सब कुछ बर्बाद हो ही चुका है तो मेरे ख्याल से मुझे बेशर्मी करने में कोई शर्म नहीं।सारा खेल सगुनी का रहता है।और झुलस कोई और जाता है। झूठ बोलकर की हुई गुमराह वाली बातें न किसी धर्म में न्याय है और ना किसी धर्म में आस्था और ना किसी धार्मिक ग्रंथ ये शिक्षा देता है की किसी की जिंदगी बर्बाद करदो गुमराह करके।अब उस औरत से मुझे इतनी नफरत हो गई है की कभी दोबारा शक्ल भी न देखूं,जो महिला अपने स्वयं की बुद्धि नही लगा पाती उसे फांसी लगा लेना या जहर खा लेना ही सही होता है। बच्चे मेहनत करेंगे ये सोच के की चलो मां बाप जब बुजुर्ग होंगे तो सहारा बनेंगे साथ । लेकिन नहीं उनको तो फर्जी कंपनी में पैसे लगाना है। परमेश्वर के लिए जीना है परमेश्वर के लिए मरना है तो उम्मीद हमसे क्यों करना है।परमेश्वर के होते उनका रखवाली इंसान कहां करेंगे परिवार से कहां मतलब है उनको साहिब। उनको तो केवल अपने जीवन को देखना है हम क्या कर रहे हैं क्या नही उनसे उन्हें कोई मतलब ही नहीं है। क्या किया है हमारे लिए घंटा कुछ भी नहीं सगुनी मामा के मोह माया में जिंदगी कुर्बान कर दी तो उम्मीद भी उन्ही से रखे हमसे क्या उम्मीद रखना। हमें तो सिर्फ मौत का ही रास्ता दिखाया और कुछ नहीं।
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