ज़मीन हड़पने के लिए मुर्दे के नाम पर बना दी फर्जी वसीयत: बालोद में पटवारी और रिश्तेदार के खिलाफ FIR दर्ज
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बालोद–बुधवार 20/05/2026
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बालोद (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से जालसाजी और धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कलयुगी रिश्तेदार ने कथित तौर पर हल्का पटवारी के साथ मिलीभगत कर एक मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी वसीयतनामा तैयार करवा लिया। इसके बाद संयुक्त खाते में दर्ज अन्य वारिसों के नाम कटवाकर पूरी जमीन अपने नाम कर ली और उसे चुपके से बेच भी दिया। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब देवरी थाने में आरोपी पटवारी और मुख्य आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला बालोद जिले के देवरी थाना अंतर्गत ग्राम मुजगहन का है। शिकायतकर्ता महेंद्र कुमार साहू (56 वर्ष) ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उनके दिवंगत मामा रेवाराम साहू के नाम पर ग्राम मुजगहन में खसरा नंबर 937 की करीब 1.09 हेक्टेयर (लगभग ढाई एकड़) जमीन थी। दिवंगत रेवाराम ने साल 2006 में एक पंजीकृत (Registered) वसीयतनामा बनवाया था, जिसके आधार पर इस जमीन के संयुक्त खाते में महेंद्र कुमार साहू, मनीष साहू और मोहन दास उर्फ राजू के साथ-साथ आरोपी पोषण साहू का नाम भी बतौर वारिस दर्ज था। सभी का इस जमीन पर संयुक्त मालिकाना हक था और इसका कभी बंटवारा नहीं हुआ था। 20 साल पुराना फर्जी स्टांप पेपर और पटवारी का खेल शिकायत के मुताबिक, साल 2023 में आरोपी पोषण साहू (पिता तेज लाल साहू) की नीयत खराब हो गई। उसने पूरी जमीन अकेले हड़पने के लिए तत्कालीन हल्का पटवारी राजीव कुमार श्रीरंगे (हल्का नंबर 03) के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची। आरोपियों ने साल 2003 का एक ₹50 का फर्जी स्टांप पेपर तैयार किया। इसमें यह दिखाया गया कि मृतक रेवाराम ने यह पूरी जमीन अकेले पोषण साहू के नाम पर वसीयत कर दी है। इस फर्जी दस्तावेज के सहारे पटवारी राजीव कुमार श्रीरंगे ने बिना किसी सक्षम अधिकारी (राजस्व न्यायालय) के आदेश के और बिना अन्य सह-खातेदारों (महेंद्र और मनीष) को कोई नोटिस या सूचना दिए, राजस्व रिकॉर्ड से उनके नाम गायब कर दिए। मई 2023 में नामांतरण कर जमीन पूरी तरह पोषण साहू के नाम चढ़ा दी गई। नाम बदलते ही चुपके से बेच दी जमीन रिकॉर्ड में खुद को इकलौता मालिक घोषित कराने के ठीक बाद, आरोपी पोषण साहू ने 28 दिसंबर 2023 को इस पूरी जमीन को नागेंद्र कुमार बघेल नाम के एक व्यक्ति को बेच दिया और रजिस्ट्री भी करा दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब साल 2024 में परिवादी महेंद्र कुमार साहू अपनी जमीन का खाता विभाजन (बंटवारा) कराने पटवारी के पास पहुंचे। तब उन्हें पता चला कि उनका नाम तो बहुत पहले ही काटा जा चुका है और जमीन किसी और को बेची जा चुकी है। एसडीएम जांच में खुली पोल, अब दर्ज हुआ मुकदमा पीड़ित महेंद्र साहू ने इसकी शिकायत कलेक्टर और एसडीएम से की। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डौंडीलोहारा द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह पाया गया कि हल्का पटवारी राजीव कुमार श्रीरंगे ने गंभीर लापरवाही और नियम विरुद्ध कार्य करते हुए बिना किसी वैध अदालती आदेश के नाम विलोपित किए थे। पटवारी यह भी नहीं बता पाया कि उसने किस दस्तावेज के आधार पर यह सुधार किया था। एसडीएम की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के निर्देश पर अब देवरी थाना पुलिस ने आरोपी पोषण साहू और तत्कालीन पटवारी राजीव कुमार श्रीरंगे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 34 (समान आशय) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस मामले की आगे की विवेचना कर रही है।
एफआईआर दिनांक 14/05/2026
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