अवैध वनों की चल रही तस्करी,प्रशासन की नजर अबतक नहीं पड़ी,वनविभाग नींद मे
राजनादगांव/खुज्जी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पथरानवागांव तथा अरजकुंड के रास्ते की जाती है वनों की अवैध तस्करी...
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राजनांदगांव तथा बालोद जिले के सीमा क्षेत्र में बसे ग्राम अरजकुंड्ड में तथा निकटवर्ती ग्राम जामनारा जो की कच्ची महुआ शराब के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध हो चुके हैं। कच्चे देशी महुआ शराब पीने के लिए दूर दूर से लोगों का आना जाना होता रहता है। वही बता दें...यह ग्राम दोनो जिलों के सीमा में होने के कारण चारो ओर से जंगल से घिरा हुआ है। कच्चे मादक पदार्थ महुआ की अवैध शराब के अलावा यह क्षेत्र जंगल से घिरा हुआ है। अंतिम छोर होने की वजह से प्रशासन का नजर भी नहीं पड़ रही है। बता दे की बालोद जिले के लकड़ी दलालों के लिए यह क्षेत्र काफी मुनाफाकारी क्षेत्र साबित हो चुका है।
नजदीक ग्रामों में दलाल दिन में मजदूरों से पेड़ों को कटवा लेने के बाद ट्रैक्टर से भरकर रातों रात ढुलाई करवाते हैं। रात के अंधेरे में तस्करी करने में आसानी हो जाती है। बिना डर के शाम 6 बजने के बाद निडरता से सप्लाई कर लेते हैं। वहीं इस मामले में संबंधित ग्राम पंचायत के मुखिया से चर्च में पता चला की ग्राम पंचायतों को इस मामले में (वनों की कटाई के संबंध में) कोई जानकारी नहीं होना बताया गया।
पंचायतों को कोई जानकारी नहीं होना यानी जंगली पेड़ों की अवैध रूप से तस्करी की जा रही है।
अतः अबतक के सभी मामलो में तस्कर रात्रि कालीन ही वनों की ढुलाई करते पाए गए हैं।
इससे साबित होता है की क्षेत्र में चल रहे (1–अवैध तस्करी पर अबतक प्रशासन को जानकारी ही नहीं है।
2–या फिर वन विभाग के अधिकारी इस पर कार्रवाई ही नहीं करना चाहते।
3–या फिर अधिकारियों की मिलीभगत के चलते अनदेखा किया जा रहा है।)
राजनादगांव और बालोद दोनों ही जिले के उच्च अधिकारियों को इस पर मिलकर कार्रवाई करनी होगी,तभी क्षेत्र के जंगलों को कटने से बचाया जा सकेगा। वनों की कटाई से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगाया जा सकेगा।
प्रशासन की कार्रवाई जरूरी है ताकि मानव स्वास्थ्य तथा जंगली जीवों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव से बच सके। क्षेत्रवाशियों ने इस मामले में, मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अनुरोध किया है की दलालों पर शीघ्र कार्रवाई हो और पर्यावरण संतुलन बना रहे।

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